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कार अटैचमेंट में धोखा: असली केस और 12 खतरे के निशान

Car attachment scams: real cases and 12 red flags

भारत में कार अटैचमेंट का ज़्यादातर काम असली है। कंपनियां, सरकारी दफ्तर और MNC सच में मंथली कॉन्ट्रैक्ट पर गाड़ियां लेते हैं। लेकिन इस लाइन में बड़े धोखे भी हुए हैं, जिनमें मालिकों की गाड़ी भी गई और महीनों का किराया भी। नीचे हम बता रहे हैं कि वो धोखे कैसे हुए और बचने के लिए आप क्या-क्या चेक कर सकते हैं।

भारत में कार अटैचमेंट धोखाधड़ी के असली केस

ये केस डेक्कन हेराल्ड ने बेंगलुरु से रिपोर्ट किए थे। यही तरीके किसी भी शहर में अपनाए जा सकते हैं।

  • 150 गाड़ियां लीज़ पर (2021)। बेंगलुरु की एक ट्रैवल कंपनी ने मालिकों से तय मंथली किराए पर करीब 150 गाड़ियां लीज़ पर लीं। कुछ महीने किराया दिया। फिर ऑफिस बंद हो गया और फ़ोन बंद आने लगे। पुलिस के मुताबिक़ गाड़ियां नकली कागज़ों से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में बेच दी गई थीं। बाद में ऑपरेटर मुंबई में पकड़ा गया।
  • किराए की 70 गाड़ियां बेच दीं (2022)। एक कैब ड्राइवर जो "ट्रैवल एजेंट" बन गया था, उसने मंथली या वीकली पक्के किराए का वादा करके मालिकों को फंसाया, फिर उनकी करीब 70 गाड़ियां गैरकानूनी तरीके से बेच दीं।
  • 24 गाड़ियां बरामद। एक ट्रैवल एजेंसी के मैनेजर ने भरोसा जीतने के लिए कुछ गाड़ियों का किराया दिया, फिर और गाड़ियां इकट्ठी कीं, उन्हें बेचा और भाग गया।
  • गाड़ियों के बदले लोन ले लिया (2023)। एक कैब ड्राइवर ने नकली कागज़ों से किराए की गाड़ियां दिखाकर उनके बदले लोन ले लिया। मालिक शिकायत न करें, इसलिए वो उन्हें हर दो-तीन महीने में थोड़ा-थोड़ा पैसा देता रहा।

हर केस में एक बात कॉमन थी

मालिक की गाड़ी किसी एजेंट के पास गई, किसी नामी कंपनी या सरकारी दफ्तर के पास नहीं। और कोई ढंग का लिखित कॉन्ट्रैक्ट नहीं था जिसमें लिखा हो कि असली क्लाइंट कौन है।

ये धोखा आम तौर पर कैसे होता है

  1. ऑफ़र। तय मंथली किराया जो सुनने में आसान लगे। अक्सर सुनने को मिलता है "ड्राइवर की ज़रूरत नहीं, परमिट की ज़रूरत नहीं"।
  2. भरोसा। पहले एक से तीन महीने किराया टाइम पर आता है।
  3. और गाड़ियां। एजेंट और गाड़ियां इकट्ठी करता है, जिनमें से कई पहले फंसे लोगों के भेजे मालिकों की होती हैं।
  4. गायब। पेमेंट बंद, ऑफिस बंद। गाड़ियां नकली कागज़ों से बेच दी जाती हैं, उनके बदले लोन ले लिया जाता है, या दूसरे राज्य में ले जाई जाती हैं।

असली अटैचमेंट का काम ऐसा बिल्कुल नहीं दिखता। आपकी गाड़ी किसी असली क्लाइंट की जगह पर ड्यूटी करती है और आप या आपका ड्राइवर उसके साथ रहते हैं। हर ट्रिप का रिकॉर्ड बनता है, और उसी के हिसाब से तय तारीख पर पेमेंट मिलता है।

गाड़ी अटैच करने से पहले 12 खतरे के निशान

  1. एजेंट ये नहीं बताता कि आपकी गाड़ी किस कंपनी या ऑफिस में चलेगी।
  2. कोई लिखित एग्रीमेंट नहीं। या है, पर आपको बिना पढ़े जल्दी-जल्दी साइन करने को कहा जाता है।
  3. आपसे कहा जाता है कि गाड़ी और चाबी दे दो और दूर रहो, बाकी एजेंट "संभाल" लेगा।
  4. उन्हें ओरिजिनल RC, इंश्योरेंस या परमिट चाहिए। कॉपी काफ़ी होनी चाहिए।
  5. बड़ी पक्की मंथली कमाई के वादे, पर km, घंटे, फ्यूल या ड्राइवर का पैसा कौन देगा, इस पर कोई बात नहीं।
  6. कोई क्लाइंट या कॉन्ट्रैक्ट देखने से पहले ही बड़ी फीस या डिपॉज़िट।
  7. बहुत लंबा लॉक-इन। अगर एग्रीमेंट आपकी गाड़ी को कई साल के लिए बांध देता है और छोड़ने से पहले लंबा नोटिस पीरियड मांगता है, तो खुद से पूछिए कि उन्हें आपको इतने लंबे टाइम तक फंसाकर क्यों रखना है।
  8. किराया कैश में, या लेट, या "हर दो-तीन महीने में"।
  9. न GST नंबर, न कंपनी रजिस्ट्रेशन, न कोई पता जो आप चेक कर सकें। बस एक फ़ोन नंबर।
  10. "सफ़ेद प्लेट चल जाएगी, परमिट की ज़रूरत नहीं।" नहीं चलेगी। प्राइवेट गाड़ी को किराए पर चलाना कानूनी नहीं है, और इससे आपका इंश्योरेंस बेकार हो सकता है।
  11. आपसे GPS हटाने या बंद करने को कहा जाए।
  12. आपको खुद ठीक से पेमेंट नहीं मिला, फिर भी और गाड़ियां लाने या दोस्तों को जोड़ने का दबाव।

अटैच करने से पहले अपनी गाड़ी को कैसे सेफ़ रखें

  • असली क्लाइंट का नाम लिखित में लें। एग्रीमेंट में लिखा हो कि गाड़ी कहाँ ड्यूटी करेगी, पैकेज (km और घंटे), मंथली रेट, एक्स्ट्रा km और एक्स्ट्रा घंटे का रेट, पेमेंट की तारीख और नोटिस पीरियड।
  • गाड़ी के साथ रहें। खुद चलाएं, या भरोसे का ड्राइवर रखें जो आपको रिपोर्ट करे।
  • ओरिजिनल घर पर रखें। सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी दें।
  • GPS चालू रखें। बहुत से कॉन्ट्रैक्ट में वैसे भी AIS-140 ट्रैकिंग डिवाइस ज़रूरी है, और इससे आप कभी भी देख सकते हैं कि गाड़ी कहाँ है।
  • बीच-बीच में VAHAN चेक करें। Parivahan पर अपना गाड़ी नंबर डालकर देखें कि मालिक का नाम और हाइपोथिकेशन तो नहीं बदला।
  • सिर्फ़ बैंक ट्रांसफ़र, मंथली ड्यूटी स्लिप या ट्रिप लॉग के हिसाब से। कॉपी संभालकर रखें।
  • बिज़नेस को चेक करें। GST नंबर, कंपनी का नाम और ऐसा पता मांगें जहाँ आप जा सकें। ऑनलाइन देखें कि उनके खिलाफ़ कोई कंप्लेंट तो नहीं।
  • एक गाड़ी से शुरू करें। अगर आपके पास कई गाड़ियां हैं, तो पहले एक अटैच करें, और कुछ महीने सही पेमेंट आने के बाद ही और जोड़ें।

अगर आपके साथ धोखा हो गया है तो क्या करें

  1. तुरंत GPS से अपनी गाड़ी ढूंढें, और उस क्लाइंट की जगह पर फ़ोन करें जहाँ गाड़ी को काम करना था।
  2. अपना एग्रीमेंट, पेमेंट रिकॉर्ड, चैट, ट्रिप लॉग और एजेंट की जो भी डिटेल है, सब इकट्ठा करें।
  3. अपने लोकल पुलिस स्टेशन में कंप्लेंट करें। अगर ऑनलाइन पेमेंट का धोखा है, तो नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर रिपोर्ट करें या 1930 पर कॉल करें।
  4. अपनी इंश्योरेंस कंपनी को बताएं, और अगर गाड़ी लोन पर है तो फाइनेंसर को भी।
  5. VAHAN पर देखें कि मालिक का नाम तो नहीं बदला, और अपने RTO को लिखित में जानकारी दें।

किसी ऑफ़र पर शक है? पहले हमसे पूछ लें।

किसी भी कार अटैचमेंट ऑफ़र की डिटेल +91-7065166337 पर WhatsApp करें। हम सीधा बता देंगे कि क्या नॉर्मल लग रहा है और क्या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कार अटैच करना सेफ़ है?

कार अटैचमेंट एक आम और कानूनी काम है, जब आपकी कमर्शियल गाड़ी लिखित कॉन्ट्रैक्ट पर किसी नामी कंपनी, सरकारी दफ्तर या ट्रांसपोर्ट वेंडर के यहाँ ड्यूटी करती है। दिक्कत उन एजेंटों से है जो गाड़ी आपके हाथ से ले लेते हैं, ज़रूरत से ज़्यादा अच्छी कमाई का वादा करते हैं, या कागज़ी काम छोड़ देते हैं। कुछ भी साइन करने से पहले इस पेज के खतरे के निशान पढ़ लें।

क्या गाड़ी अटैच करने के लिए रजिस्ट्रेशन फीस देनी चाहिए?

कुछ वेंडर खुलकर ऑनबोर्डिंग या अटैचमेंट फीस लेते हैं, तो सिर्फ़ फीस मांगने का मतलब धोखा नहीं है। लेकिन जब तक आपको असली क्लाइंट का नाम, मंथली रेट, km और घंटों की लिमिट पता न हो और लिखित एग्रीमेंट हाथ में न हो, तब तक कुछ भी मत दीजिए। बड़ा डिपॉज़िट या लंबा लॉक-इन हो तो सावधान हो जाइए।

क्या एजेंट मेरी इजाज़त के बिना मेरी गाड़ी बेच सकता है?

कानूनी तौर पर नहीं। फिर भी धोखेबाज़ों ने नकली कागज़ों से ऐसा किया है, जैसा इस पेज के बेंगलुरु वाले केस दिखाते हैं। अपनी ओरिजिनल RC और कागज़ अपने पास रखें। गाड़ी में GPS चालू रखें। बीच-बीच में VAHAN रिकॉर्ड चेक करते रहें कि मालिक का नाम तो नहीं बदला या गाड़ी पर नया लोन (हाइपोथिकेशन) तो नहीं चढ़ा।

अगर गाड़ी अटैचमेंट का पेमेंट लेट हो रहा है तो क्या करें?

लेट होने की वजह लिखित में मांगिए और देखिए कि कॉन्ट्रैक्ट में पेमेंट की तारीख क्या लिखी है। अगर पैसा आना बंद हो जाए और एजेंट फ़ोन उठाना बंद कर दे, तो इंतज़ार मत कीजिए। GPS से अपनी गाड़ी ढूंढिए, ट्रिप लॉग और एग्रीमेंट इकट्ठा कीजिए, और जल्दी से पुलिस के पास जाइए।

कार अटैचमेंट से बड़ी पक्की मंथली कमाई के वादे सच होते हैं?

इनसे सावधान रहिए। विज्ञापन में जो आंकड़े दिखते हैं वो आम तौर पर फ्यूल, ड्राइवर की सैलरी, EMI, इंश्योरेंस, मेंटेनेंस और कमीशन निकालने से पहले के होते हैं। अक्सर ये बहुत लंबी ड्यूटी और बहुत ज़्यादा km मानकर बताए जाते हैं। पूरा पैकेज लिखित में मांगिए (महीने के km, रोज़ के घंटे, फ्यूल कौन भरेगा) और अपनी असली कमाई का हिसाब खुद लगाइए।

गाड़ी अटैच करनी है?

WhatsApp पर अपनी गाड़ी की डिटेल भेजें। बस 2 मिनट लगेंगे।

Send your car details on WhatsApp.

ईमेल: hello@attachcar.com

जानकारी कहाँ से ली

जहाँ हो सके, हम नियम सरकारी सोर्स से मिलाकर लिखते हैं। कानून, टेंडर और रेट बदलते रहते हैं। कोई भी कॉन्ट्रैक्ट साइन करने से पहले अपने RTO, गाड़ी लेने वाली कंपनी या दफ्तर, या टैक्स एक्सपर्ट से एक बार पक्का कर लें।

  1. Deccan Herald: Travel company shut after leasing 150 cars in a big scam (Bengaluru, 2021)
  2. Deccan Herald: Cabbie-turned-travel agent illegally sells 70 rented cars (Bengaluru, 2022)
  3. Deccan Herald: Travel agency manager arrested, 24 cars recovered
  4. Deccan Herald: Cabbie pledges rented cars to raise loans with fake documents
  5. Deccan Herald: Gang buys cabs from EMI defaulters, sells them with fake documents
  6. Parivahan: Vehicle-related services (VAHAN) for checking registration details
  7. National Cyber Crime Reporting Portal

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